प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई 2026) को देश की जनता से कुछ बेहद अहम अपीलें की हैं. वैश्विक स्तर पर चल रहे ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, पीएम मोदी ने आम लोगों से अपनी जीवनशैली में बदलाव करने और देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में सीधा योगदान देने का आग्रह किया है.
हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए और उसके बाद देश भर के नागरिकों को दिए गए संदेश में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर में जो भू-राजनीतिक तनाव चल रहा है, उसका असर भारत पर कम से कम पड़े, इसके लिए “राष्ट्रीय स्तर पर ज़िम्मेदार” (Nationally Responsible) विकल्प चुनने का समय आ गया है.
पीएम मोदी की 4 प्रमुख अपीलें और ऐलान
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश हित को सर्वोपरि रखकर संकल्प लेने होंगे. उन्होंने जनता से निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा:
- सोने की खरीदारी एक साल के लिए टालें: पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक गैर-ज़रूरी सोने की खरीदारी से बचें. इसका सीधा उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार से बाहर जाने वाले भारी धन को रोकना है.
- पेट्रोल-डीज़ल की बचत और ईवी (EV) को बढ़ावा: ईंधन के बढ़ते आयात बिल को देखते हुए प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीज़ल बचाने की कड़ी सलाह दी है. उन्होंने लोगों से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) का इस्तेमाल करने, कार-पूलिंग करने और माल ढुलाई के लिए रेलवे का उपयोग करने पर ज़ोर दिया है.
- विदेशी दौरों से परहेज़: देश की विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए उन्होंने नागरिकों को फिलहाल गैर-ज़रूरी विदेशी यात्राओं (Foreign Tours) से बचने और स्थानीय स्तर (Local) पर उत्पादित चीज़ों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
- किसानों और आम घरों के लिए संदेश: कृषि क्षेत्र के लिए पीएम मोदी ने किसानों से डीज़ल पंपों की जगह सोलर पंप लगाने का आग्रह किया है. साथ ही रासायनिक खादों (Fertilizers) के उपयोग को 50 प्रतिशत तक घटाने की अपील की है. इसके अलावा, उन्होंने आम घरों में खाने के तेल (Edible oil) की खपत को भी कम करने का सुझाव दिया है.
अचानक इस अपील की वजह क्या है?
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की इस अप्रत्याशित अपील के पीछे मुख्य वजह बढ़ता आयात बिल और वैश्विक संकट है.
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुए तनाव (U.S.-Iran war) और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply chain) में बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक आयात करता है.
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अकेले इन चार चीज़ों का कुल आयात 240.7 अरब डॉलर का किया है, जो देश के कुल आयात बिल का लगभग 31% हिस्सा है. ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए सरकार जनता से सहयोग मांग रही है.
‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और विकसित भारत का लक्ष्य
इन अपीलों के अलावा, हाल ही में बजट 2026-27 के बाद के वेबिनार्स में भी पीएम मोदी ने जनता के सामने सरकार का विज़न रखा है. उन्होंने कहा है कि भारत अब “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (Reform Express) पर सवार है.
प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि 140 करोड़ भारतीय अब सिर्फ ‘सबसे तेज़ अर्थव्यवस्था’ होने के तमगे से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि भारत जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए उन्होंने बायो-फार्मा शक्ति मिशन, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और युवाओं व छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने वाली कई योजनाओं की घोषणा की है.
पीएम मोदी की ये ताज़ा घोषणाएं और अपीलें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार वैश्विक संकट के संभावित असर से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए आम जनता की सीधी और सक्रिय भागीदारी को समय की सबसे बड़ी मांग मान रही है.




